तुम सब में हो

 तुम सब में हो


हवाओं से पूछ हवाओं के नज़ारो से पूछ

खिली जो वादियाँ, या बहारों से पूछ

फूलों में लिपटी शबनम की लड़ियों से पूछ

समन्दर के रुख़ या किनारों से पूछ

तेरे नाम के सिवा कौन हो सकता है?

यहाँ मुकम्मल सारे जहाँ पर...


भीगी शाम के मस्ताना से पूछ

या ख़ुद किसी के होठ के दाना से पूछ

सब मदहोश हैं इस क़दर तेरे खयाल में

जो तेरे लब चलते हैं मेरे रूमाल पे

कोई मुझे भी बदनाम कर दें

तेरे इश्क़ को आसमान कर दें

जो देखूँ तुझे नज़र उठाकर कभी

तू झूमे और मैं झूमूँ

तेरे माथ को जबभी चुमूँ



क्या तू मुझसे सुनेगी, तो मेरे दिल से पूछ

या मेरे हर दर्द से बने जो प्यार मुुश्किल से पूछ

क्या हर इक बात तुझे बता दूँ या फिर...

इस जमाने से कोई राज़ छुपा ही लूँ ..

ये सच है तू हैं तो ये जहाँ भी प्यारा हैं..

जमीं पे आँसू और आँखों में तारा हैं



 


- मनोज कुमार 

  गोण्डा उत्तर प्रदेश

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